....... मार्च 1996 में स्वर्गीय मिर्जा अनवर बेग द्वारा स्थापित यह एक प्रसिद्ध शैक्षिक केंद्र है। इस संस्थान के संस्थापक मिर्जा अनवर बेग का संबंध तैमूर तुर्क के बरलास वंश से है, जो मुगलों के रूप में भारत में आया था। उनके पूर्वज मध्यकाल से ही सैन्य छावनी चलाने वाले जागीरदार के रूप में मिर्जापुर गाँव में रहने लगे थे, जो अब ब्लॉक मुख्यालय है, जो आजमगढ़ जिले के निजामाबाद उपनगर के पास है। मिर्जा साहब केवल सात वर्ष के थे जब उनके पिता श्री मिर्जा मुजफ्फर बेग का निधन एक दमकल दुर्घटना में हो गया था। मिर्जा की देखभाल की जिम्मेदारी उनके दादा के हाथों में आ गई। 1947 में लखनऊ और आजमगढ़ के शिब्ली जॉर्ज स्कूल से शिक्षा प्राप्त करने के बाद 1950 में एएमयू में दाखिला लिया इस दौरान वे स्वर्गीय ख्वाजा अब्दुल मजीद, स्वर्गीय डॉ. ज़ाकिर हुसैन (तत्कालीन वी.सी. ए.एम.यू.), नवाब अहमद सईद और रहमत उल्लाह शेरवानी जैसे महानुभावों के संपर्क में आए। इन महानुभावों के संपर्क से उन्हें बहुत लाभ हुआ। शेरवानी के निजी पुस्तकालय से भी उन्हें भरपूर प्रेरणा मिली। उन्होंने भूगोल में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की और सागर विश्वविद्यालय में शोधार्थी के रूप में पंजीकृत हुए
मौलाना आज़ाद शिक्षा केंद्र के संस्थापक और प्रबंधक स्वर्गीय मिर्ज़ा अनवर बेग ने 1962 में इस विद्यालय की स्थापना करके अपने मिशन को आगे बढ़ाया। इसके लिए उन्होंने उसरहटा में बंजर भूमि का चयन किया। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, जो क्षेत्र कुछ समय से बंजर था, वह शिक्षा केंद्रों के एक दिलचस्प समूह में बदल गया। यह शिक्षा के क्षेत्र में एक अनोखी हरित क्रांति थी।
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